विमान वाहक युद्धपोत (IAC(P71)) ‘विक्रांत’

 वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 4 अगस्त 2021 को देश के पहले स्वदेशी िवमानवाहक युद्धपोत विक्रांत [IAC (P71)] का अंतिम ट्रायल कोच्‍ची के निकट समुद्र में प्रारंभ हुआ।
  • 40,000 टन वजनी इस विमानवाहक पोत को वर्ष 2022 में 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आईएनएस विक्रांत के रूप में नौसेना में शामिल किया जाना प्रस्तावित है ?

पृष्ठभूमि

  • वर्तमान में, आईएनएस विक्रमादित्य (रूस निर्मित एडमिरल गोर्शकोष) भारतीय नौसेना का एकमात्र विमानवाहक पोत है जिसे वर्ष, 2013 में शामिल किया गया था।
  • देश के पहले दो विमानवाहक पोत, आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विराट क्रमश: 1961 और 1987 में नौसेना में शामिल हुए थे जो ब्रिटेन द्वारा निर्मित थे।
  • आईएनएस विक्रांत भारत का सबसे पहला विमान वाहक पोत था जो वर्ष 1997 में सेवामुक्त हुआ।
  • आईएनएस विक्रांत ने 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • आईएनएस विक्रांत द्वारा देश को मिले स्वाभिमान के कारण नए युद्ध पोत को भी विक्रांत नाम दिया गया है।
  • वर्ष, 2002 में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने परियोजना निर्माण को मंजूरी दी।
  • वर्ष, 2007 मे निर्माण के पहले चरण के लिए कोचीन शिपयार्ड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।
  • जबकि 2009 से पोत निर्माण प्रारंभ लगभग 23000 करोड़ रुपये पोत की निर्माण लागत रही।

विशेषता

  • भारतीय नौसेना के ‘नौसेना डिजाइन निदेशालय’(डीएनडी) द्वारा डिजाइन किया गया स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी)‘विक्रांत’ जहाजरानी मंत्रालय (एमओएस) के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा निर्मित किया गया है।
  • विक्रांत 76% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ का एक प्रमुख उदाहरण है।
  • यह भारतीय नौसना और कोचीन शिपयार्ड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया पहला विमानवाहक पोत है।
  • स्वदेशी विमानवाहक पोत 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा और 59 मीटर ऊंचा है, जिसमें अधिरचना भी शामिल है। अधिरचना में पांच सहित कुल 14 डेक हैं।
  • यह लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्‍टर सहित कुल 34 मिश्रित विमानों को ले जाने में सक्षम है।
  • 2300 से अधिक कक्षों वाले इस पोत को चालक दल के लगभग 1700 सदस्यों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें महिला अधिकारियों के लिए विशेष केबिन की भी व्यवस्था है।
  • जहाज को मशीनरी संचालन, जहाज नेविगेशन और उत्तरजीविता के लिए बहुत उच्‍च स्तरीय स्वचालन प्रणाली से युक्त किया गया है।
  • विक्रांत के पास 28 समुद्री मील की शीर्ष गति और लगभग 7500 समुद्री मील की क्षमता के साथ 18 समुद्री मील की परिभ्रमण गति है।
  • यह विमान वाहक पोत, बराक एलआर-एसएएम (लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) वायु रक्षा और एके-630 क्‍लोज-इन हथियार प्रणाली के अलावा उन्‍नत सेंसर और एक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण से युक्त है।
  • विक्रांत पर कामोव 31 आरंभिक चेतावनी तथा कामोव 26 पनडुब्बी रोधी युद्धक हेलीकॉप्टर भी होगा।

स्वदेशी निर्माण

  • आईएसी की डिलीवरी के साथ, भारत स्वदेशी रूप से डिजाइन विमान वाहक बनाने की क्षमता वाले चुनिंदा राष्ट्रों के समूह में शामिल हो जाएगा, जो भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ पहल का प्रत्यक्ष प्रमाण होगा।
  • इससे बड़ी संख्या में सहायक उद्योगों के विकास के अलावा, प्रतिदिन 2000 सीएसएल कर्मियों और सहायक उद्योगों में लगभग 12000 कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसरों के साथ, उत्कृष्ठ डिजाइन और निर्माण क्षमताओं में वृद्धि हुई है।
  • सीएसएल और उसके उप-ठेकेदारों द्वारा काम के अलावा उपकरणों की खरीद के लिए 76 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है जिसका पुन : निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रहा है।
  • 100 एमएसएमई सहित लगभग 550 भारतीय फर्मंे सीएसएल के साथ पंजीकृत हैं, जो आईएसी के निर्माण के लिए विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
  • भारतीय नौसेना का जहाज निर्माण कार्यक्रम 44 जहाजों और पनडुब्बियों के साथ आवश्यक‘आर्थिक प्रोत्साहन’ प्रदान करने के लिए स्वदेश में निर्मित होने के आदेश पर उचित रूप्‍ से तैयार किया गया है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी