- वर्तमान परिप्रेक्ष्य
- 11 अगस्त, 2021 को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष डॉ. बिबेक देबरॉय ने बुजुर्गों के लिए जीवन का गुणवत्ता सूचकांक जारी किया।
- ईएसी-पीएम के अनुरोध पर ‘इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस’ द्वारा यह सूचकांक तैयार किया गया है, जो ऐसे मुद्दों पर प्रकाश डालता है जिनका अक्सर बुजुर्गों के सामने आने वाली समस्याओं में उल्लेख नहीं किया जाता है।
- मुख्य उद्देश्य
- यह रिपोर्ट भारतीय राज्यों में उम्र बढ़ने के क्षेत्रीय पैटर्न की पहचान करने के साथ-साथ देश में उम्र बढ़ने की समग्र स्थिति का भी आकलन करती है।
- यह रिपोर्ट इस बात का भी गहराई से आकलन करती है कि भारत अपनी बुजुर्ग आबादी के कल्याण के लिए किस प्रकार अच्छा काम कर रहा है।
- सूचकांक के आधार
- सूचकांक का महत्व
- यह सूचकांक भारत में बुजुर्ग आबादी की जरूरतों और अवसरों को समझने के तौर-तरीकों को विस्तृत बनाता है।
- यह सूचकांक इस बारे में भी प्रकाश डालता है कि मौजूदा और भविष्य की बुजुर्ग आबादी के जीवन को बेहतर बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आज की युवा आबादी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में निवेश किया जाए।
- यह सूचकांक बुजुर्ग लोगों के आर्थिक, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के मुख्य क्षेत्रों का मापन करने के साथ-साथ देश में बुजुर्ग लोगों की स्थिति के बारे में भी गहन जानकारी प्रदान करता है।
- इसके अलावा यह सूचकांक उचित रैंकिंग के माध्यम से राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन स्तंभों और संकेतकों पर भी प्रकाश डालता है, जिनमें वे सुधार कर सकते हैं।
- इस सूचकांक को एक उपकरण के रूप में उपयोग करते हुए राज्य सरकारें और हितधारक उन क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं, जिनके बारे में काम करने की जरूरत है, ताकि अपनी बुजुर्ग पीढ़ी को एक आरामदायक जीवन उपलब्ध कराया जा सके।
- रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं
- स्वास्थ्य प्रणाली स्तंभ का अखिल भारतीय स्तर पर उच्चतम राष्ट्रीय औसत 66.97 होने तथा समाज कल्याण में यह औसत 62.34 होने का पता चला है।
- वित्तीय कल्याण में यह स्कोर 44.7 रहा है, जो शिक्षा प्राप्ति और रोजगार स्तंभ में 21 राज्यों के कमजोर प्रदर्शन के कारण कम रहा है और यह सुधार की संभावना को दर्शाता है।
- राज्यों ने विशेष रूप से आय सुरक्षा स्तंभ बहुत खराब प्रदर्शन किया है, क्योंकि आधे से अधिक राज्यों ने आय सुरक्षा में, राष्ट्रीय औसत (33.03) से भी कम प्रदर्शन किया है, जो सभी स्तंभों में सबसे कम है।
- ये स्तंभ-वार विश्लेषण राज्यों को बुजुर्ग आबादी की स्थिति का आकलन करने और उनकी प्रगति में बाधा डालने वाले मौजूदा अंतरालों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
- राजस्थान और हिमाचल प्रदेश क्रमशः बुजुर्ग और अपेक्षाकृत बुजुर्ग आबादी वाले राज्यों में सर्वाधिक स्कोर हासिल करने वाले राज्य हैं।
- जबकि चंडीगढ़ और मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश और पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य श्रेणी में सर्वाधिक स्कोर हासिल करने वाले क्षेत्र हैं।
- बुजुर्ग आबादी वाले राज्य ऐसे राज्य हैं, जहां बुजुर्ग आबादी 5 मिलियन से अधिक है, जबकि अपेक्षाकृत बुजुर्ग आबादी वाले राज्य ऐसे राज्य हैं, जहां बुजुर्ग आबादी 5 मिलियन से कम है।
- अन्य तथ्य
- बुजर्गों के लिए जीवन की गुणवत्ता की श्रेणीवार रैकिंग-
बुजुर्ग आबादी वाले राज्य
राज्य
स्कोर
समग्र रैंकिंग
राजस्थान
54.61
1
महाराष्ट्र
53.31
2
बिहार
51.82
3
तमिलनाडु
47.93
4
मध्य प्रदेश
47.11
5
कर्नाटक
46.92
6
उत्तर प्रदेश
46.80
7
आंध्र प्रदेश
44.37
8
पश्चिम बंगाल
41.01
9
तेलंगाना
38.19
10
अपेक्षाकृत बुजुर्ग आबादी वाले राज्य
राज्य
स्कोर
समग्र रैंकिंग
हिमाचल प्रदेश
61.04
1
उत्तराखंड
59.47
2
हरियाणा
58.16
3
ओडिशा
53.95
4
झारखंड
53.40
5
गोवा
52.56
6
केरल
51.49
7
पंजाब
50.87
8
छत्तीसगढ़
49.78
9
गुजरात
49.00
10
पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य
राज्य
स्कोर
समग्र रैंकिंग
मिजोरम
59.79
1
मेद्यालय
56.00
2
मणिपुर
55.71
3
असम
53.13
4
सिक्किम
50.82
5
नगालैंड
50.77
6
त्रिपुरा
49.18
7
अरुणाचल प्रदेश
39.28
8
केंद्रशासित प्रदेश
राज्य
स्कोर
समग्र रैंकिंग
चंडीगढ़
63.78
1
दादरा और नगर हवेली
58.58
2
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
55.54
3
दिल्ली
54.39
4
लक्षद्वीप
53.79
5
दमन और दीव
53.28
6
पुडुचेरी
53.03
7
जम्मू और कश्मीर
46.16
8
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, 60+आबादी भारत की आबादी का 8.6 प्रतिशत है अर्थात 10.38 करोड़ वृद्ध लोग हैं।
- वर्ष 2021 तक वृद्ध लोगों की आबादी 14.3 करोड़ एवं 2026 तक 17.3 करोड़ होने की संभावना है।
- तीन प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से वर्ष 2050 में वृद्धजनों की आबादी बढ़कर 31.9 करोड़ हो जाएगी।
- 75 प्रतिशत वृद्धजन किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होते हैं।
- 40 प्रतिशत वृद्धजन को कोई न कोई दिव्यांगता है और 20 प्रतिशत वृद्धजन मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित रोगों से ग्रसित हैं।
- बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए भारत सरकार की पहलें
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय बुजुर्ग लोगों के कल्याण के लिए एक नोडल एजेंसी है।
- राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक परिषद(एनसीएसआरसी)
- वृद्धजनों के लिए बनी राष्ट्रीय नीति (एनपीओपी)-1999 के संदर्भ में सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय वृद्धजन परिषद (एनसीओपी) का गठन किया गया। Æवृद्धजनों से जुड़े कार्यक्रमों व नीतियों के निर्माण के लिए एनसीओपी सर्वोच्च निकाय है।
- वर्ष 1999 में राष्ट्रीय वृद्धजन परिषद (एनसीओपी) का गठन किया गया। इसकी अवधि 5 वर्ष निर्धारित की गई।
- वर्ष 2005 और 2011 में इसका पुनर्गठन किया गया।
- 2012 में इसे नया नाम दिया गया – ‘राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक परिषद (एनसीएसआरसी)’।
- माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) विधेयक, 2019, 2009 के अधिनियम में संशोधन हेतु संसद में प्रस्तावित है।
- महत्वपूर्ण योजनाएं
- वृद्ध व्याक्तियों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (आईपीओपी)
- वृद्ध व्यक्तियों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (आईपीओपी) 1992 से सरकार द्वारा कार्यान्वित एक योजना है।
- इस नीति का मुख्य लक्ष्य वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
- यह उन्हें विभिन्न बुनियादी सुविधाएं जैसे भोजन, आश्रय, चिकित्सा देखभाल और यहां तक कि मनोरंजन के अवसर प्रदान करके किया जाता है।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई)
- यह योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) बीपीएल श्रेणी से संबंधित वरिष्ठ नागरिकों के लिए भौतिक सहायता और जीवन-सहायक उपकरण प्रदान करने की एक योजना है।
- यह वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष से वित्त पोषित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS)
- यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NASP) के हिस्से के रूप में लागू की गई है।
- यह एक गैर-अंशदायी योजना है और 60 वर्ष से ऊपर के नागरिकों या शरणार्थियों के लिए मासिक आय प्रदान करती है, जिनके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है।
- वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई)
- यह योजना वित्त मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है। वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई) पहली बार वर्ष 2003 में शुरू की गई थी और फिर 2014 में फिर से शुरू की गई थी।
- इसका उद्देश्य सदस्यता राशि पर गारंटीकृत न्यूनतम रिटर्न पर एक सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन देना है।
- प्रधानमंत्री वय वंदना योजना
- प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएनवीवीवाई) मई, 2017 में वृद्धवस्था में वृद्धावस्था के दौरान सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी।
- यह वीपीबीवाई का सरलीकृत संस्करण है और इसे भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा लागू किया जाएगा।
- संकलन- मनीष प्रियदर्शी
बुजुर्गों के लिए जीवन गुणवत्ता सूचकांक