वर्तमान परिप्रेक्ष्य
- 4 अगस्त, 2021 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने संशोधित समग्र शिक्षा स्कीम (SSS) को 2021-22 से 2025-26 तक (पांच वर्षों) की अवधि के लिए जारी रखने को मंजूरी प्रदान की है।
- जिसे समग्र शिक्षा 2.0 कहा गया है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और सतत विकास लक्ष्य -4 (SDG-4) के साथ संरेखित करने के लिए इसका उन्नयन किया गया है।
उद्देश्य
- शिक्षा के स्तर में सुधार करना।
- स्कूल से लेकर 12वीं कक्षा तक के सभी आयामों को शामिल किया जाएगा, जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान की जा सके।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के कार्यान्वयन में भी सहायता प्रदान करना।
- सीखने की प्रक्रिया पर निगरानी, बाल वाटिका की स्थापना। शिक्षकों की क्षमताओं का विकास एवं प्रशिक्षण कार्य पर भी जोर दिया जाएगा।
समग्र शिक्षा स्कीम (SSS) 2.0 के महत्वपूर्ण घटक
- योजना की प्रत्यक्ष पहुंच को बढ़ाने के लिए सभी बाल केंद्रित हस्तक्षेप (Child Centric Interventions) एक निश्चित समयावधि में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्लेटफाॅर्म पर ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ (DBT) के माध्यम से सीधे छात्रों को प्रदान किए जाएंगे।
- भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए योजना में भाषा शिक्षक नियुक्ति का एक नया घटक जोड़ा गया है।
- माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की योजना ‘निष्ठा’ (NISTHA) के तहत विशिष्ट मॉड्यूल।
- इसमें 16 से 19 वर्ष की आयु के बच्चों को ‘राष्ट्रीय/राज्य मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान’ (NIOS/SOS) के माध्यम से उनके माध्यमिक/उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा को पूरा कराने के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, विकलांग बच्चों को प्रति कक्षा 2000 रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
- राज्य में बाल अधिकार संरक्षण एवं सुरक्षा हेतु राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को 50 रुपये प्रति प्राथमिक विद्यालय के लिए वित्तीय सहायता।
अन्य घटक
- इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 की सिफारिशों के साथ जोड़ा गया, ताकि सभी बच्चों की एक समान और समावेशी कक्षा के माहौल के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच हो।
- समग्र शिक्षा 2.0 का कुल वित्तीय परिव्यय 2,94,283.04 करोड़ रुपये है, जिसमें, 1,85,398.32 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा भी शामिल है।
- इस योजना में 11 लाख 60 हजार विद्यालय, 15 करोड़ 56 लाख से अधिक छात्र और सरकारी एवं सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों के 57 लाख शिक्षक (पूर्व-प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक) शामिल है।
- ‘निपुण (NIPUN) भारत’’, (मौलिक साक्षरता और संख्यात्मकता पर एक राष्ट्रीय मिशन) के अंतर्गत शिक्षण सामग्री के लिए प्रति छात्र प्रति वर्ष 500 रुपये, नियमावली और संसाधनों के लिए 150 रुपये प्रति शिक्षक, मूल्यांकन के लिए 10-20 लाख रुपये प्रति जिला निर्धारित किए गए हैं।
- राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र, परख (PARAKH) (प्रदर्शन, आकलन, समीक्षा और समग्र विकास के लिए ज्ञान का विश्लेषण) की गतिविधियों के लिए सहायता।
- यदि किसी स्कूल के कम-से-कम 2 छात्र राष्ट्रीय स्तर पर खेलो इंडिया स्कूल खेलों में पदक हासिल करते हैं, तो उस स्कूल को 25000 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खेल अनुदान।
- सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) को बारहवीं कक्षा तक उन्नत करने का प्रावधान।
- कक्षा IX से XII (KGBV टाइप IV) तक के लिए मौजूदा बालिका छात्रावासों के लिए वित्तीय सहायता को 25 लाख रुपये प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष किया गया।
- डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट कक्षाओं, आभासी कक्षाओं और डीटीएच चैनलों के प्रसारण के लिए सहायता सहित सूचना संवाद और प्रशिक्षण प्रयाेगशाला, स्मार्ट क्लासरूम का प्रावधान भी किया गया है।

सं. आदित्य भारद्वाज