वैश्विक शांति सूचकांक,2021

 वर्तमान परिदृश्य-

  • 17 जून, 2021 को अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक ‘इंस्टीट्‍यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) ने वैश्विक शांति सूचकांक (GPI), 2021 जारी किया
  • यह इस सूचकांक का 15वां संस्करण है।
  • प्रतिवर्ष जारी किए जाने वाले इस सूचकांक का पहला संस्करण वर्ष 2007 में जारी किया गया था।
  • सर्वाधिक शांतिपूर्ण देश-आइसलैंड
  • सर्वाधिक अशांत देश-अफगानिस्तान
  • भारत की रैंकिंग – 135वीं

सूचकांक का आधार

  • इस सूचकांक में 163 देशों/क्षेत्रों (वैश्विक जनसंख्या का 99.7 %) को शामिल किया गया है।
  • इस सूचकांक में विश्व में शांति के स्तर का मापन 23 गुणात्मक और मात्रात्मक संकेतकों के आधार पर किया गया है।
  • इन संकेतकों को तीन विस्तृत विषयों (Three domains) के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है, जो निम्नलिखित हैं-

(i) समाज में बचाव व सुरक्षा का स्तर (The Level of Societal safety & Security)
(ii) वर्तमान में जारी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का प्रसार (The Extent of ongoing Domestic & Interantional conflict)
(iii) सैन्यीकरण का स्तर (The Degree of Militaristaion)

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • वैश्विक शांति सूचकांक, 2021 के अनुसार, वर्ष 2020 में वैश्विक औसत शांति स्तर में 0.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
  • पिछले 13 वर्षों में यह 9वां अवसर है, जब वैश्विक शांति स्तर Aमें गिरावट दर्ज की गई है।
  • सूचकांक के अनुसार, वर्ष 2020 में 87 देशों में शांति के स्तर में सुधार हुआ है, जबकि 73 देशों में गिरावट दर्ज की गई है।
  • GPI, 2021 के अनुसार, विश्व के 10 सर्वाधिक शांतिपूर्ण देशों में से 8 यूरोप के हैं तथा यूरोप विश्व का सर्वाधिक शांतिमय क्षेत्र बना हुआ है।
  • विश्व के नौ में से तीन भौगोलिक क्षेत्रों के शांति सूचकांक में सुधार हुआ है। जिनमें क्रमश : मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENP) यूरोप एवं दक्षिण एशिया है।
  • सूचकांक के अनुसार, मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) के सर्वाधिक सुधार दर्ज करने के बावजूद विश्व का सर्वाधिक अशांत क्षेत्र बना हुआ है।
  • दक्षिण एशिया दूसरा सर्वाधिक अशांत क्षेत्र है। Æउत्तरी अमेरिका में शांति के स्तर में सर्वाधिक गिरावट (1.8 प्रतिशत) दर्ज की गईं।
  • GPI , 2021 के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्‍न स्थिति एंव गंभीर आर्थिक नुकसान के कारण भी हिंसक घटनाएं घटित हुईं।
  • जनवरी, 2020 से अप्रैल, 2021 के दौरान कोविड-19 महामारी के कारण कुल 5000 से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं, जो कम-से-कम 158 देशों में घटित हुईं।
  • GPI, 2021 के अनुसार, 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हिंसा का आर्थिक प्रभाव, क्रय शक्ति समता (PPP) के संदर्भ में 14.96 ट्रिलियन डॉलर का हुआ, जो वैश्विक जीडीपी का 11.6 प्रतिशत या प्रति व्यक्ति 1942 डॉलर के बराबर है।

रैंकिंग

  • वैश्विक शांति सूचकांक (GPI), 2021 के अनुसार, आइसलैंड विश्व का सर्वाधिक शांतिपूर्ण देश है, जो वर्ष 2008 से ही सूचकांक में शीर्ष पर बना है।
  • GPI-2021 के अनुसार, अफगानिस्तान लगातार चौथे वर्ष विश्व का सबसे अशांत देश (Least Peaceful Country in the World) बना हुआ है।
  • यूक्रेन जिसे सूचकांक में 142वां स्थान प्राप्त हुआ है उसने वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना में सर्वाधिक सुधार किया है।

वैश्विक शांति सूचकांक, 2021 सर्वाधिक  शांतिपूर्ण 5 देश

रैंक

देश

स्कोर

1.

आइसलैंड

1.1

2.

न्यूजीलैंड

1.253

3.

डेनमार्क

1.256

4.

पुर्तगाल

1.267

5

स्लोवेनिया

1.315

वैश्विक शांति सूचकांक, 2021 सर्वाधिक अशांत 5 देश

रैंक

देश

स्कोर

163

अफगानिस्तान

3.631

162

यमन

3.407

161

सीरिया

3.371

160

दक्षिणी सूडान

3.363

159

इराक

3.257

भारत एवं दक्षिण एशियाई देशों की स्थिति

  • वैश्विक शांति सूचकांक, 2021 में भारत को 163 देशों की सूची में दो स्थान पर सुधार के साथ 135वां स्थान (स्कोर-2.553) प्राप्‍त हुआ है।
  • भूटान 22वीं रैंक के साथ दक्षिण एशिया का सर्वाधिक शांतिपूर्ण देश बना हुआ है।

वैश्विक शांति सूचकांक, 2021 दक्षिण एशियाई देशों की स्थिति

रैंक

देश

स्कोर

22

भूटान

1.51

85

नेपाल

2.033

91

बांग्‍लादेश

2.068

95

श्रीलंका

2.083

135

भारत

2.553

150

पाकिस्तान

2.868

163

अफगानिस्तान

3.651

इंस्टीट्‍यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP)

  • इसकी स्थापना वर्ष 2007 में अॉस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध उद्यमी एवं समाजसेवी स्टीव किल्‍लेलिया ने किया था।
  • यह विश्व का एक अग्रणी विचार मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक शंाति का विश्लेषण करना तथा इसके आर्थिक लाभों की मात्रा का निर्धारण करते हुए विभिन्‍न प्रणालियों का विकास करना है।
  • इसका मुख्यालय सिडनी, आॅस्ट्रेिलया में स्थित है।
  • IEP द्वारा ही प्रतिवर्ष वैश्विक आतंकवाद सूचकांक का भी प्रकाशन किया जाता है।

संकलन -महेश चन्द्र शुक्‍ल