- वर्तमान परिदृश्य-:
- 7 मार्च, 2021 को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्तमान में कृषि वानिकी योजना के लिए चल रहे उप-मिशन के तहत रेशम क्षेत्र में कृषि वानिकी की शुरूआत करने के लिए एक अभिसरण मॉडल पर केन्द्रीय रेशम बोर्ड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया ।
- पृष्ठभूमि- कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति, 2014 की सिफारिश के आधार पर वर्ष 2016-17 से कृषि वानिकी पर उप-मिशन (SMAF)योजना को कार्यान्वित कर रहा है।
- फरवरी, 2014 में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड एग्रोफॅरेस्ट्री कांग्रेस में राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति 2014 की शुरूआत की गई थी।
- योजना का उद्देश्य-
- इस योजना का उद्देश्य किसानों को आय के अतिरिक्त स्त्रोत के लिए कृषि की फसल के साथ-साथ बहुद्देश्यीय पूर्ण पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहन देना॥
- लकड़ी आधारित हर्बल उद्योग के लिए बढ़ा हुआ फीड स्टॉक सुनिश्चित करना।
- प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘मेंक फॉर द वर्ल्ड’ दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए किसानों को रेशम कीट पालन आधारित कृषि वानिकी मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- योजना से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य-
- कृषि वानिकी के लिए उपमिशन योजना को राष्ट्रीय संवहनीय कृषि मिशन (NMSA-National Mission for sustainable Agriculture) के तहत लागू किया जा रहा है।
- भारत विश्व का पहला देश है, जिसने राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति की शुरूआत की।
- कृषि वानिकी के लिए उपमिशन योजना को सभी राज्यों एवं सभी केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया जा रहा है।
- यह समझौता ज्ञापन उत्पादकों को बेहतर प्रतिफल के लिए कृषि वानिकी में एक नया आयाम सम्मिलित करेगा।
- यह अनुबंध अनेक प्रकार के रेशम , जिसके लिए भारत प्रसिद्ध है, के उत्पादन में लाभकारी सिद्ध होगा।
- केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी), जो कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अन्तर्गत आता है, रेशम क्षेत्र में कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरक का कार्य करेगा।
- इस योजना द्वारा औषधीय महत्व वाली वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाता है।
- NMSA-:
- सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन की शुरूआत वर्ष 2014-15 में की गयी थी।
- एनएमएसए (NMSA) जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत उल्लिखित आठ मिशनों में से एक है।
- NMSA के उद्देश्य-
- समग्र कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देकर कृषि को अधिक उत्पादक टिकाऊ पारिश्रामिक और जलवायु को लचीला बनाना है।
- मिट्टी और नमी संरक्षण के उपाय, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कुशल जल प्रबंधन प्रथाओं और मुख्यधारा की तकनीकों का उपयोग करना।
- मृदा उर्वरता नक्शे, मृदा एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के मृदा परीक्षण आधारित अनुप्रयोग, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग आदि पर आधारित मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को अपनाना
- प्रति बूँद अधिक फसल प्राप्त करने के लिए कवरेज का विस्तार करने के लिए कुशल जल प्रबंधन के माध्यम से जल संसाधनों के उपयाेग का अनुकूलन करना।
- अन्य चालू मिशनों (जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन उपायों के क्षेत्र में कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय मिशन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन आदि) के साथ मिलकर किसानों एवं हितधारकों की क्षमता विकसित करना।
- आगे की राह-
- एनएमएसए जल उपयोग दक्षता, पोषक प्रबंधन और आजीविका विविधीकरण के प्रमख आयामों को पूरा करेगा, जिससे कि पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों, प्रकृति संसाधनों के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एकीकृत खेती को आगे बढ़ाकर सतत विकास मार्ग को अपनाया जा सके।