शनि ग्रह के 20 नए उपग्रह



  • शनि ग्रह

  • सूर्य से दूरी के आधार पर शनि (Saturn) सौरमंडल का छठा ग्रह है।

  • बृहस्पति (Jupiter) के बाद यह हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।

  • शनि ग्रह का आयतन (Volume) पृथ्वी के आयतन के 700 गुना से भी अधिक है, इसका अर्थ यह हुआ कि पृथ्वी के आकार के 700 से भी अधिक ग्रह शनि के अंदर समा सकते हैं।

  • एक ओर पृथ्वी, जहां सौरमंडल का सबसे सघन (Densest) ग्रह है, वहीं शनि का घनत्व सबसे कम है।

  • शनि ग्रह का वायुमंडल मुख्यतः हाइड्रोजन (75%) तथा हीलियम (25%) से निर्मित है।

  • शनि के छल्ले

  • शनि एक 'विस्तृत वलय प्रणाली' (Extensive Ring System) से युक्त ग्रह है, जो हजारों व्यक्तिगत छल्लों (वलयों) से निर्मित है।

  • वास्तव में, ये छल्ले विभिन्न पदार्थों के असंख्य छोटे-छोटे पिण्डों से बनी पट्टियां हैं।

  • हालांकि शनि एकमात्र ऐसा ग्रह नहीं है, जिसके चारों ओर छल्ले हैं।

  • शनि के अतिरिक्त बृहस्पति, यूरेनस तथा नेप्च्यून के भी चारों ओर छल्ले विद्यमान हैं।

  • लेकिन शनि के छल्ले सबसे बड़े एवं सबसे चमकीले हैं।

  • शनि ग्रह के छल्ले मुख्यतः बर्फ एवं धूल के कणों से निर्मित हैं।

  • 1610 ई. में एक दूरबीन की सहायता से शनि ग्रह के छल्लों का अवलोकन करने वाले गैलीलियो पहले व्यक्ति थे।

  • हालांकि गैलीलियो ने सबसे पहले शनि ग्रह के छल्लों को देखा था, लेकिन ये डच वैज्ञानिक क्रिश्चियन हाइगेंस थे, जिन्होंने 1655 ई. में सर्वप्रथम यह प्रस्तावित किया कि शनि ग्रह के चारों ओर एक ठोस छल्ला विद्यमान है।

  • उपग्रह

  • अभी तक शनि ग्रह के ज्ञात उपग्रहों की संख्या 62 थी।

  • टाइटन शनि ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह है।

  • 1672 ई. में खोजा गया रिया (Rhea) शनि का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है।

  • विलियम हर्शेल द्वारा 1789 ई. में खोजा गया 'एनसीलेडस' (Enceladus) शनि ग्रह का सबसे चमकीला (Brightest) उपग्रह तो है ही, साथ ही इसकी परावर्तकता (Reflectivity) सौर प्रणाली के किसी भी अन्य निकाय (Body) की तुलना में सबसे अधिक है।

  • यह उपग्रह अपनी सतह पर आने वाले सूर्य के लगभग 100 प्रतिशत प्रकाश को परावर्तित कर देता है।

  • इसकी उच्च परावर्तकता का एक कारण इसकी सतह का लगातार स्वच्छ एवं सफेद बर्फ के कणों से ढके रहना है।

  • उल्लेखनीय है कि पृथ्वी पर जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक 'जैविक यौगिकों' (Organic Compounds) सहित वाष्पशील गैसों, जल वाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, लवणों तथा सिलिका आदि की उपस्थिति की पुष्टि एनसीलेडस पर हुई है।

  • इसी कारण बहुत से वैज्ञानिकों का मत है कि सौरमंडल में पृथ्वी के अतिरिक्त एनसीलेडस ही वह स्थान है, जो 'सर्वाधिक निवासनीय' (Most Habitable Place) साबित हो सकता है।

  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 7 अक्टूबर, 2019 को 'अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ' (IAU : International Astronomical Union) के 'माइनर प्लैनेट सेंटर' (Minor Planet Center) द्वारा शनि ग्रह के 20 नए उपग्रहों (Moons) की खोज की घोषणा की गई।

  • अमेरिका के वाशिंगटन डी.सी. स्थित 'कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस' (Carnegie Institution for Science) के खगोलविद् स्कॉट एस. शेपर्ड के नेतृत्व में एक दल ने शनि की परिक्रमा कर रहे इन 20 नए उपग्रहों की खोज की है।

  • हवाई द्वीप स्थित 'मौना की' (Mauna Kea) नामक एक सुषुप्त ज्वालामुखी के ऊपर स्थापित 'सुबारू दूरबीन' (Subaru Telescope) की मदद से इन नए उपग्रहों की खोज की गई।

  • शनि के सर्वाधिक उपग्रह

  • इस नई खोज के साथ ही अब छल्लेदार ग्रह (Ringed Planet) शनि के कुल उपग्रहों की संख्या बढ़कर 82 तक पहुंच गई है।

  • इस प्रकार शनि सौर प्रणाली का ऐसा ग्रह बन गया है, जिसके ज्ञात प्राकृतिक उपग्रहों की संख्या सर्वाधिक है।

  • शनि ग्रह से पूर्व सौर प्रणाली में बृहस्पति (Jupiter) के सर्वाधिक (79) उपग्रह थे।

  • नए उपग्रहों का विवरण

  • शनि ग्रह के नए खोजे गए उपग्रहों में से प्रत्येक का व्यास लगभग 5 किमी. (लगभग 3 मील) है।

  • कुल 20 उपग्रहों में से 17 उपग्रह अक्ष के परितः शनि के घूर्णन की विपरीत दिशा में उसका परिक्रमण कर रहे हैं।

  • जबकि शेष तीन उपग्रह शनि के अपने अक्ष के परितः घूर्णन की दिशा में ही उसका परिक्रमण कर रहे हैं।

  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • उल्लेखनीय है कि जुलाई, 2018 में स्कॉट एस. शेपर्ड के नेतृत्व में ही खगोलविदों ने बृहस्पति (Jupiter) के 12 नए उपग्रहों की खोज की घोषणा की थी, जिससे उसके कुल उपग्रहों की संख्या बढ़कर 79 तक पहुंच गई है।

  • कार्नेगी इंस्टीट्यूट ने फरवरी, 2019 में ट्विटर के माध्यम से एक प्रतियोगिता का आयोजन किया था, जिसमें बृहस्पति के पांच नए उपग्रहों के नामकरण हेतु सुझाव आमंत्रित किए गए थे।

  • इस प्रतियोगिता के उपरांत डब्ल्यूजीपीएसएन (WGPSN : Working Group for Planetary System omenclature) ने जिन पांच नामों को अनुमोदित किया वे हैं

  •    (i)  ईरीन (Eirene) (ii) फिलोफ्रोसाइन (Philophrosyne) (iii) यूफीम (Eupheme) (iv) पांडिया (Pandia) तथा (v) एर्सा।

  • इसी प्रकार कार्नेगी इंस्टीट्यूट ने अक्टूबर, 2019 में शनि के सभी 20 नए उपग्रहों के नामकरण हेतु एक प्रतियोगिता (Contest) आरंभ की है, जिसके तहत ट्विटर के माध्यम से नाम सुझाने की अंतिम तिथि 6 दिसंबर, 2019 निर्धारित की गई है।

  • निष्कर्ष

  • शनि के नव-अन्वेषित उपग्रहों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को उनके गठन (Formation) के संबंध में जानकारी प्राप्त हो सकती है, इसके अतिरिक्त उस समय शनि ग्रह के आस-पास की परिस्थितियों के बारे में भी खुलासा करने में मदद प्राप्त हो सकती है। विश्व की सबसे विशालकाय एवं अत्याधुनिक दूरबीनों की मदद से वैज्ञानिकों ने शनि ग्रह के 5 किमी. तक के आकार के, जबकि बृहस्पति के 1.6 किमी. तक के आकार के उपग्रहों की खोज करने में सफलता प्राप्त कर ली है। अगर इन ग्रहों के इससे छोटे उपग्रह भी अस्तित्व में हैं, तो उनकी खोज के लिए भविष्य में और अधिक उन्नत एवं विशाल दूरबीनों की आवश्यकता होगी।













































विभिन्न ग्रहों के उपग्रह



ग्रह



उपग्रहों की संख्या



बुध



0



शुक्र



0



पृथ्वी



1



मंगल



2



बृहस्पति



7 9



शनि



8 2



यूरेनस



2 7



नेप्च्यून



1 4